श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.11.2

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

स उच्चकाशे धवलोदरो दरोऽप्युरुक्रमस्याधरशोणशोणिमा ।✎ 1522

दाध्मायमानः करकञ्जसम्पुटे यथाब्जखण्डे कलहंस उत्स्वनः॥ २

sa uccakāśe dhavalodaro daro'pyurukramasyādharaśoṇaśoṇimā |

dādhmāyamānaḥ karakañjasampuṭe yathābjakhaṇḍe kalahaṃsa utsvanaḥ|| 2

अर्थ

भगवान्‌के होठोंकी लालीसे लाल हुआ वह श्वेतवर्णका शंख बजते समय उनके करकमलोंमें ऐसा शोभायमान हुआ, जैसे लाल रंगके कमलोंपर बैठकर कोई राजहंस उच्चस्वरसे मधुर गान कर रहा हो॥ २॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1522 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: दरो- ऽप्युरुक्रमस्याधरशोणशोणिमा → दरोऽप्युरुक्रमस्याधरशोणशोणिमा

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