॥ श्रीहरिः ॥
भगवांस्तत्र बन्धूनां पौराणामनुवर्तिनाम्।
यथाविध्युपसङ्गम्य सर्वेषां मानमादधे॥ २१
bhagavāṃstatra bandhūnāṃ paurāṇāmanuvartinām|
yathāvidhyupasaṅgamya sarveṣāṃ mānamādadhe|| 21
अर्थ
भगवान् श्रीकृष्णने बन्धु-बान्धवों, नागरिकों और सेवकोंसे उनकी योग्यताके अनुसार अलग-अलग मिलकर सबका सम्मान किया॥ २१॥
भगवांस्तत्र बन्धूनां पौराणामनुवर्तिनाम्।
यथाविध्युपसङ्गम्य सर्वेषां मानमादधे॥ २१
भगवान् श्रीकृष्णने बन्धु-बान्धवों, नागरिकों और सेवकोंसे उनकी योग्यताके अनुसार अलग-अलग मिलकर सबका सम्मान किया॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.11.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 132) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/11/21/