श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.11.21

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

भगवांस्तत्र बन्धूनां पौराणामनुवर्तिनाम्।

यथाविध्युपसङ्गम्य सर्वेषां मानमादधे॥ २१

bhagavāṃstatra bandhūnāṃ paurāṇāmanuvartinām|

yathāvidhyupasaṅgamya sarveṣāṃ mānamādadhe|| 21

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने बन्धु-बान्धवों, नागरिकों और सेवकोंसे उनकी योग्यताके अनुसार अलग-अलग मिलकर सबका सम्मान किया॥ २१॥

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