श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.11.20

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

नटनर्तकगन्धर्वाः सूतमागधवन्दिनः।

गायन्ति ६ चोत्तमश्लोकचरितान्यद्भुतानि च॥ २०

naṭanartakagandharvāḥ sūtamāgadhavandinaḥ|

gāyanti cottamaślokacaritānyadbhutāni ca|| 20

अर्थ

बहुत-से नट, नाचनेवाले, गानेवाले, विरद बखाननेवाले सूत, मागध और वंदीजन भगवान् श्रीकृष्णके अद्भुत चरित्रोंका गायन करते हुए चले॥ २०॥✎ 80 81

टिप्पणियाँ

  1. ६

    प्रा०पा०—गायन्त उत्तमश्लोक०।

    (मुद्रित पृष्ठ 132)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #80 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #81 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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