उस समय भगवान्के प्रिय सखा घुँघराले बालोंवाले अर्जुनने अपने प्रियतम श्रीकृष्णका वह श्वेत छत्र, जिसमें मोतियोंकी झालर लटक रही थी और जिसका डंडा रत्नोंका बना हुआ था, अपने हाथमें ले लिया॥ १७॥✎ 7778
सितातपत्रं जग्राह मुक्तादामविभूषितम्।
रत्नदण्डं गुडाकेशः प्रियः प्रियतमस्य ह॥ १७
उस समय भगवान्के प्रिय सखा घुँघराले बालोंवाले अर्जुनने अपने प्रियतम श्रीकृष्णका वह श्वेत छत्र, जिसमें मोतियोंकी झालर लटक रही थी और जिसका डंडा रत्नोंका बना हुआ था, अपने हाथमें ले लिया॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.10.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 127) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/10/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)