श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.10.15

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

मृदङ्गशङ्खभेर्यश्‍च वीणापणवगोमुखाः।

धुन्धुर्यानकघण्टाद्या नेदुर्दुन्दुभयस्तथा॥ १५

mṛdaṅgaśaṅkhabheryaśca vīṇāpaṇavagomukhāḥ|

dhundhuryānakaghaṇṭādyā nedurdundubhayastathā|| 15

अर्थ

भगवान्‌के प्रस्थानके समय मृदंग, शङ्ख, भेरी, वीणा, ढोल, नरसिंगे, धुन्धुरी, नगारे, घंटे और दुन्दुभियाँ आदि बाजे बजने लगे॥ १५॥✎ 77 78

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #77 शब्दोंके बीचका स्थान: कोदेखती → को देखती
  • #78 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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