अनुक्रमणिका श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) अध्याय 4 श्लोक 48 ॥ श्रीहरिः ॥
कृष्णप्राप्तिकरं शश्वत् प्रेमानन्दफलप्रदम्।
श्रीमद्भागवतं शास्त्रं कलौ कीरेण भाषितम्॥ ४८
kṛṣṇaprāptikaraṃ śaśvat premānandaphalapradam|
śrīmadbhāgavataṃ śāstraṃ kalau kīreṇa bhāṣitam|| 48
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श्रीशुकदेवजीके मुखसे कहा हुआ यह श्रीमद्भागवतशास्त्र तो कलियुगमें साक्षात् श्रीकृष्णकी प्राप्ति करानेवाला और नित्य प्रेमानन्दरूप फल प्रदान करनेवाला है॥ ४८॥
इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां द्वितीये वैष्णवखण्डे श्रीमद्भागवतमाहात्म्ये भागवतश्रोतृवक्तृलक्षणश्रवणविधि- निरूपणं नाम चतुर्थोऽध्यायः॥ ४॥
॥ समाप्तमिदं श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम्॥
॥ हरिः ॐ तत्सत्॥
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श्रीमद्भागवत महापुराण POST.4.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1008) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/4/48/
मुद्रित ग्रन्थमें: द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1008
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कृष्णप्राप्तिकरं शश्वत् प्रेमानन्दफलप्रदम्।
श्रीमद्भागवतं शास्त्रं कलौ कीरेण भाषितम्॥ ४८
श्रीशुकदेवजीके मुखसे कहा हुआ यह श्रीमद्भागवतशास्त्र तो कलियुगमें साक्षात् श्रीकृष्णकी प्राप्ति करानेवाला और नित्य प्रेमानन्दरूप फल प्रदान करनेवाला है॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.4.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1008) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/4/48/