श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.45

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

कथान्ते कीर्त्तनं नित्यं समाप्तौ जागरं चरेत्।

ब्राह्मणान् भोजयित्वा तु दक्षिणाभिः प्रतोषयेत्॥ ४५

kathānte kīrttanaṃ nityaṃ samāptau jāgaraṃ caret|

brāhmaṇān bhojayitvā tu dakṣiṇābhiḥ pratoṣayet|| 45

अर्थ

प्रतिदिन कथाके अन्तमें कीर्तन करे और कथासमाप्तिके दिन रात्रिमें जागरण करे। समाप्ति होनेपर ब्राह्मणोंको भोजन कराकर उन्हें दक्षिणासे सन्तुष्ट करे॥ ४५॥

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