सूतजी कहते हैं—ऋषिगण! श्रीमद्भागवत और श्रीभगवान्का स्वरूप सदा एक ही है और वह है सच्चिदानन्दमय॥ ३॥
श्रीमद्भागवतस्याथ श्रीमद्भगवतः सदा।
स्वरूपमेकमेवास्ति सच्चिदानन्दलक्षणम्॥ ३
सूतजी कहते हैं—ऋषिगण! श्रीमद्भागवत और श्रीभगवान्का स्वरूप सदा एक ही है और वह है सच्चिदानन्दमय॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.4.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1002) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/4/3/