श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.3

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

सूत उवाच

श्रीमद्भागवतस्याथ श्रीमद्भगवतः सदा।

स्वरूपमेकमेवास्ति सच्चिदानन्दलक्षणम्॥ ३

śrīmadbhāgavatasyātha śrīmadbhagavataḥ sadā|

svarūpamekamevāsti saccidānandalakṣaṇam|| 3

अर्थ

सूतजी कहते हैं—ऋषिगण! श्रीमद्भागवत और श्रीभगवान्‌का स्वरूप सदा एक ही है और वह है सच्चिदानन्दमय॥ ३॥

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