श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.10

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

श्रोतारोऽथ निरूप्यन्ते श्रीमद्विष्णुकथाश्रयाः।

प्रवरा अवराश्‍चेति श्रोतारो द्विविधा मताः॥ १०

śrotāro'tha nirūpyante śrīmadviṣṇukathāśrayāḥ|

pravarā avarāśceti śrotāro dvividhā matāḥ|| 10

अर्थ

अब भगवान् श्रीकृष्णकी कथाका आश्रय लेनेवाले श्रोताओंका वर्णन करते हैं। श्रोता दो प्रकारके माने गये हैं—प्रवर (उत्तम) तथा अवर (अधम)॥ १०॥

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