राजेन्द्र परीक्षित्! इस प्रकार विचार करनेपर सभी व्रजवासी भगवान्के अंगमें स्थित हैं। शरणागतोंका भय दूर करनेवाले जो ये वज्र हैं, इनका स्थान श्रीकृष्णके दाहिने चरणमें है॥ ७॥
एवं वज्रस्तु राजेन्द्र प्रपन्नभयभंजकः।
श्रीकृष्णदक्षिणे पादे स्थानमेतस्य वर्तते॥ ७
राजेन्द्र परीक्षित्! इस प्रकार विचार करनेपर सभी व्रजवासी भगवान्के अंगमें स्थित हैं। शरणागतोंका भय दूर करनेवाले जो ये वज्र हैं, इनका स्थान श्रीकृष्णके दाहिने चरणमें है॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 994) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/7/