श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.7

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

एवं वज्रस्तु राजेन्द्र प्रपन्‍नभयभंजकः।

श्रीकृष्णदक्षिणे पादे स्थानमेतस्य वर्तते॥ ७

evaṃ vajrastu rājendra prapannabhayabhaṃjakaḥ|

śrīkṛṣṇadakṣiṇe pāde sthānametasya vartate|| 7

अर्थ

राजेन्द्र परीक्षित्! इस प्रकार विचार करनेपर सभी व्रजवासी भगवान्‌के अंगमें स्थित हैं। शरणागतोंका भय दूर करनेवाले जो ये वज्र हैं, इनका स्थान श्रीकृष्णके दाहिने चरणमें है॥ ७॥

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