॥ श्रीहरिः ॥
त्वत्प्रसादेन बहवो मनुष्या भारताजिरे।
श्रीमद्भागवतप्राप्तौ सुखं प्राप्स्यन्ति शाश्वतम्॥ ६२
tvatprasādena bahavo manuṣyā bhāratājire|
śrīmadbhāgavataprāptau sukhaṃ prāpsyanti śāśvatam|| 62
अर्थ
तुम्हारे ही प्रसादसे इस भारतवर्षमें रहनेवाले अधिकांश मनुष्य श्रीमद्भागवतकथाकी प्राप्ति होनेपर शाश्वत सुख प्राप्त करेंगे॥ ६२॥
त्वत्प्रसादेन बहवो मनुष्या भारताजिरे।
श्रीमद्भागवतप्राप्तौ सुखं प्राप्स्यन्ति शाश्वतम्॥ ६२
तुम्हारे ही प्रसादसे इस भारतवर्षमें रहनेवाले अधिकांश मनुष्य श्रीमद्भागवतकथाकी प्राप्ति होनेपर शाश्वत सुख प्राप्त करेंगे॥ ६२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.62 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1000) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/62/