॥ श्रीहरिः ॥
विष्णुरातस्तु श्रुत्वा तदुद्धवं प्रणतोऽब्रवीत्।
सूतजी कहते हैं—यह सुनकर राजा परीक्षित् उद्धवजीको प्रणाम करके उनसे बोले।
परीक्षिदुवाच
हरिदास त्वया कार्यं श्रीभागवतकीर्तनम्॥ ५२
viṣṇurātastu śrutvā taduddhavaṃ praṇato'bravīt|
haridāsa tvayā kāryaṃ śrībhāgavatakīrtanam|| 52
अर्थ
सूतजी कहते हैं—यह सुनकर राजा परीक्षित् उद्धवजीको प्रणाम करके उनसे बोले।
विष्णुरातस्तु श्रुत्वा तदुद्धवं प्रणतोऽब्रवीत्।
हरिदास त्वया कार्यं श्रीभागवतकीर्तनम्॥ ५२
सूतजी कहते हैं—यह सुनकर राजा परीक्षित् उद्धवजीको प्रणाम करके उनसे बोले।
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 999) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/52/