उसीके बलसे यहाँ नारदकुण्डपर सदा स्वेच्छानुसार विराजमान रहता हूँ। भगवान्के भक्तोंको श्रीमद्भागवतके सेवनसे श्रीकृष्णतत्त्वका प्रकाश प्राप्त हो सकता है॥ ५०॥
तस्मान्नारदकुण्डेऽत्र तिष्ठामि स्वेच्छया सदा।
कृष्णप्रकाशो भक्तानां श्रीमद्भागवताद् भवेत्॥ ५०
उसीके बलसे यहाँ नारदकुण्डपर सदा स्वेच्छानुसार विराजमान रहता हूँ। भगवान्के भक्तोंको श्रीमद्भागवतके सेवनसे श्रीकृष्णतत्त्वका प्रकाश प्राप्त हो सकता है॥ ५०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.50 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 999) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/50/