उद्धवजी कहते हैं—श्रीमद्भागवतके माहात्म्यके सम्बन्धमें यह आख्यायिका मैंने अपने गुरु श्रीबृहस्पतिजीसे सुनी और उनसे भागवतका उपदेश प्राप्त कर उनके चरणोंमें प्रणाम करके मैं बहुत ही आनन्दित हुआ॥ ४३॥
श्रीभागवतमाहात्म्य इमामाख्यायिकां गुरोः।
श्रुत्वा भागवतं लब्ध्वा मुमुदेऽहं प्रणम्य तम्॥ ४३
उद्धवजी कहते हैं—श्रीमद्भागवतके माहात्म्यके सम्बन्धमें यह आख्यायिका मैंने अपने गुरु श्रीबृहस्पतिजीसे सुनी और उनसे भागवतका उपदेश प्राप्त कर उनके चरणोंमें प्रणाम करके मैं बहुत ही आनन्दित हुआ॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 998) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/43/