इसमें तनिक भी सन्देह नहीं कि समस्त द्वारकावासियोंमें ये लोग सबसे बढ़कर धन्य हैं, जिन्हें व्रजमें निवास करानेके लिये भगवान् श्रीकृष्णने अर्जुनको आज्ञा की थी॥ ४॥
द्वारकास्थेषु सर्वेषु धन्या एते न संशयः।
येषां व्रजनिवासाय पार्थमादिष्टवान् प्रभुः॥ ४
इसमें तनिक भी सन्देह नहीं कि समस्त द्वारकावासियोंमें ये लोग सबसे बढ़कर धन्य हैं, जिन्हें व्रजमें निवास करानेके लिये भगवान् श्रीकृष्णने अर्जुनको आज्ञा की थी॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 994) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/4/