श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.35

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

यदा विष्णुः स्वयं वक्ता लक्ष्मीश्‍च श्रवणे रता।

तदा भागवतश्रावो मासेनैव पुनः पुनः॥ ३५

yadā viṣṇuḥ svayaṃ vaktā lakṣmīśca śravaṇe ratā|

tadā bhāgavataśrāvo māsenaiva punaḥ punaḥ|| 35

अर्थ

जब भगवान् विष्णु स्वयं वक्ता होते हैं और लक्ष्मीजी प्रेमसे श्रवण करती हैं, उस समय प्रत्येक बार भागवतकथाका श्रवण एक मासमें ही समाप्त होता है॥ ३५॥

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