जहाँ श्रीमद्भागवतके एक या आधे श्लोकका ही पाठ होता है, वहाँ भी श्रीकृष्ण अपनी प्रियतमा गोपियोंके साथ विद्यमान रहते हैं॥ १३॥
श्रीमद्भागवतं यत्र श्लोकं श्लोकार्द्धमेव च।
तत्रापि भगवान् कृष्णो बल्लवीभिर्विराजते॥ १३
जहाँ श्रीमद्भागवतके एक या आधे श्लोकका ही पाठ होता है, वहाँ भी श्रीकृष्ण अपनी प्रियतमा गोपियोंके साथ विद्यमान रहते हैं॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 995) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/13/