श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.7

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

प्रजास्तु मुदितास्तस्य कृष्णकीर्तनतत्पराः।

परमानन्दसम्पन्‍ना राज्यं तस्यैव तुष्टुवुः॥ ७

prajāstu muditāstasya kṛṣṇakīrtanatatparāḥ|

paramānandasampannā rājyaṃ tasyaiva tuṣṭuvuḥ|| 7

अर्थ

उनके प्रजाजनोंको भी बड़ा आनन्द था, वे सदा भगवान्‌के मधुर नाम तथा लीलाओंके कीर्तनमें संल‌ग्‍न हो परमानन्दके समुद्रमें डूबे रहते थे और सदा ही वज्रनाभके राज्यकी प्रशंसा किया करते थे॥ ७॥

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