श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.3

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

माथुरान् ब्राह्मणांस्तत्र वानरांश्‍च पुरातनान्।

विज्ञाय माननीयत्वं तेषु स्थापितवान् स्वराट्॥ ३

māthurān brāhmaṇāṃstatra vānarāṃśca purātanān|

vijñāya mānanīyatvaṃ teṣu sthāpitavān svarāṭ|| 3

अर्थ

इनके अतिरिक्त सम्राट् परीक्षित‍्ने मथुरामण्डलके ब्राह्मणों तथा प्राचीन वानरोंको, जो भगवान्‌के बड़े ही प्रेमी थे, बुलवाया और उन्हें आदरके योग्य समझकर मथुरा नगरीमें बसाया॥ ३॥

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