उद्धवजीके सम्बन्धमें एक निश्चित बात यह भी है कि उन्हें भगवान्ने अपना उत्सव-स्वरूप प्रदान किया है। भगवान्का उत्सव उद्धवजीका अंग है, वे उससे अलग नहीं रह सकते; इसलिये अब तुमलोग वज्रनाभको साथ लेकर वहाँ जाओ और कुसुमसरोवरके पास ठहरो॥ २५॥
आत्मोत्सवरूपत्वं हरिणा तस्मै समर्पितं नियतम्।
तस्मात्तत्र स्थित्वा कुसुमसरःपरिसरे सवज्राभिः॥ २५
उद्धवजीके सम्बन्धमें एक निश्चित बात यह भी है कि उन्हें भगवान्ने अपना उत्सव-स्वरूप प्रदान किया है। भगवान्का उत्सव उद्धवजीका अंग है, वे उससे अलग नहीं रह सकते; इसलिये अब तुमलोग वज्रनाभको साथ लेकर वहाँ जाओ और कुसुमसरोवरके पास ठहरो॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.2.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 992) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/2/25/