श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.25

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

आत्मोत्सवरूपत्वं हरिणा तस्मै समर्पितं नियतम्।

तस्मात्तत्र स्थित्वा कुसुमसरःपरिसरे सवज्राभिः॥ २५

ātmotsavarūpatvaṃ hariṇā tasmai samarpitaṃ niyatam|

tasmāttatra sthitvā kusumasaraḥparisare savajrābhiḥ|| 25

अर्थ

उद्धवजीके सम्बन्धमें एक निश्‍चित बात यह भी है कि उन्हें भगवान्‌ने अपना उत्सव-स्वरूप प्रदान किया है। भगवान्‌का उत्सव उद्धवजीका अंग है, वे उससे अलग नहीं रह सकते; इसलिये अब तुमलोग वज्रनाभको साथ लेकर वहाँ जाओ और कुसुमसरोवरके पास ठहरो॥ २५॥

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