श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.23

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

फलभूमिर्व्रजभूमिर्दत्ता तस्मै पुरैव सरहस्यम्।

फलमिह तिरोहितं सत्तदिहेदानीं स उद्धवोऽलक्ष्यः॥ २३

phalabhūmirvrajabhūmirdattā tasmai puraiva sarahasyam|

phalamiha tirohitaṃ sattadihedānīṃ sa uddhavo'lakṣyaḥ|| 23

अर्थ

साधनकी फलरूपा भूमि है—व्रजभूमि; इसे भी इसके रहस्योंसहित भगवान्‌ने पहले ही उद्धवको दे दिया था। किन्तु वह फलभूमि यहाँसे भगवान्‌के अन्तर्धान होनेके साथ ही स्थूल दृष्टिसे परे जा चुकी है; इसीलिये इस समय यहाँ उद्धव प्रत्यक्ष दिखायी नहीं पड़ते॥ २३॥✎ 1790

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1790 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: श्रीकृष्ण-चन्द्रकी → श्रीकृष्णचन्द्रकी

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें