श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.2.1

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अथ द्वितीयोऽध्यायः

यमुना और श्रीकृष्णपत्‍नियोंका संवाद, कीर्तनोत्सवमें
उद्धवजीका प्रकट होना

ऋषय ऊचुः

शाण्डिल्ये तौ समादिश्य परावृत्ते स्वमाश्रमम्।

किं कथं चक्रतुस्तौ तु राजानौ सूत तद् वद॥ १

śāṇḍilye tau samādiśya parāvṛtte svamāśramam|

kiṃ kathaṃ cakratustau tu rājānau sūta tad vada|| 1

अर्थ

ऋषियोंने पूछा—सूतजी! अब यह बतलाइये कि परीक्षित् और वज्रनाभको इस प्रकार आदेश देकर जब शाण्डिल्य मुनि अपने आश्रमको लौट गये, तब उन दोनों राजाओंने कैसे-कैसे और कौन-कौन-सा काम किया?॥ १॥

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