शौनकादि ब्रह्मर्षियो! जब धर्मराज युधिष्ठिर आदि पाण्डवगण स्वर्गारोहणके लिये हिमालय चले गये, तब सम्राट् परीक्षित् एक दिन मथुरा गये। उनकी इस यात्राका उद्देश्य इतना ही था कि वहाँ चलकर वज्रनाभसे मिल-जुल आयें॥ ५॥
महापथं गते राज्ञि परीक्षित् पृथिवीपतिः।
जगाम मथुरां विप्रा वज्रनाभदिदृक्षया॥ ५
शौनकादि ब्रह्मर्षियो! जब धर्मराज युधिष्ठिर आदि पाण्डवगण स्वर्गारोहणके लिये हिमालय चले गये, तब सम्राट् परीक्षित् एक दिन मथुरा गये। उनकी इस यात्राका उद्देश्य इतना ही था कि वहाँ चलकर वज्रनाभसे मिल-जुल आयें॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 983) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/1/5/