श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.41

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

वज्र संसेवनादस्य उद्धवस्त्वां मिलिष्यति।

ततो रहस्यमेतस्मात् प्राप्स्यसि त्वं समातृकः॥ ४१

vajra saṃsevanādasya uddhavastvāṃ miliṣyati|

tato rahasyametasmāt prāpsyasi tvaṃ samātṛkaḥ|| 41

अर्थ

वज्रनाभ! इस व्रजभूमिका सेवन करते रहनेसे तुम्हें किसी दिन उद्धवजी मिल जायँगे। फिर तो अपनी माताओंसहित तुम उन्हींसे इस भूमिका तथा भगवान्‌की लीलाका रहस्य भी जान लोगे॥ ४१॥

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