श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.39

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

नद्यद्रिद्रोणिकुण्डादिकुञ्जान् संसेवतस्तव।

राज्ये प्रजाः सुसम्पन्‍नास्त्वं च प्रीतो भविष्यसि॥ ३९

nadyadridroṇikuṇḍādikuñjān saṃsevatastava|

rājye prajāḥ susampannāstvaṃ ca prīto bhaviṣyasi|| 39

अर्थ

उन-उन स्थानोंमें रहकर भगवान्‌की लीलाके स्थल नदी, पर्वत, घाटी, सरोवर और कुण्ड तथा कुंज-वन आदिका सेवन करते रहना चाहिये। ऐसा करनेसे तुम्हारे राज्यमें प्रजा बहुत ही सम्पन्‍न होगी और तुम भी अत्यन्त प्रसन्‍न रहोगे॥ ३९॥

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