श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.28

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

अत्रैव व्रजभूमिः सा यत्र तत्त्वं सुगोपितम्।

भासते प्रेमपूर्णानां कदाचिदपि सर्वतः॥ २८

atraiva vrajabhūmiḥ sā yatra tattvaṃ sugopitam|

bhāsate premapūrṇānāṃ kadācidapi sarvataḥ|| 28

अर्थ

यहीं वह व्रजभूमि है, जिसमें भगवान्‌की वह वास्तवी रहस्य-लीला गुप्तरूपसे होती रहती है। वह कभी-कभी प्रेमपूर्ण हृदयवाले रसिक भक्तोंको सब ओर दीखने लगती है॥ २८॥

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