॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.6.52
अपुष्पा काकवन्ध्या च वन्ध्या या च मृतार्भका।
स्रवद्गर्भा च या नारी तया श्राव्या प्रयत्नतः॥ ५२
apuṣpā kākavandhyā ca vandhyā yā ca mṛtārbhakā|
sravadgarbhā ca yā nārī tayā śrāvyā prayatnataḥ|| 52
अर्थ
जिस स्त्रीका रजोदर्शन रुक गया हो, जिसके एक ही संतान होकर रह गयी हो, जो बाँझ हो, जिसकी संतान होकर मर जाती हो अथवा जिसका गर्भ गिर जाता हो, वह यत्नपूर्वक इस कथाको सुने॥ ५२॥