श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.50

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

सत्यं शौचं दयां मौनमार्जवं विनयं तथा।

उदारमानसं तद्वदेवं कुर्यात्कथाव्रती॥ ५०

satyaṃ śaucaṃ dayāṃ maunamārjavaṃ vinayaṃ tathā|

udāramānasaṃ tadvadevaṃ kuryātkathāvratī|| 50

अर्थ

सर्वदा सत्य, शौच, दया, मौन, सरलता, विनय और उदारताका बर्ताव करना चाहिये॥ ५०॥

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