श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.46

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

द्विदलं मधु तैलं च गरिष्ठान्‍नं तथैव च।

भावदुष्टं पर्युषितं जह्यान्‍नित्यं कथाव्रती॥ ४६

dvidalaṃ madhu tailaṃ ca gariṣṭhānnaṃ tathaiva ca|

bhāvaduṣṭaṃ paryuṣitaṃ jahyānnityaṃ kathāvratī|| 46

अर्थ

दाल, मधु, तेल, गरिष्ठ अन्‍न, भावदूषित पदार्थ और बासी अन्‍न—इनका उसे सर्वदा ही त्याग करना चाहिये॥ ४६॥

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