श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.35

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

वरणं पञ्चविप्राणां कथाभङ्गनिवृत्तये।

कर्तव्यं तैर्हरेर्जाप्यं द्वादशाक्षरविद्यया॥ ३५

varaṇaṃ pañcaviprāṇāṃ kathābhaṅganivṛttaye|

kartavyaṃ tairharerjāpyaṃ dvādaśākṣaravidyayā|| 35

अर्थ

कथामें विघ्न न हो, इसके लिये पाँच ब्राह्मणोंको और वरण करे; वे द्वादशाक्षर मन्त्रद्वारा भगवान्‌के नामोंका जप करें॥ ३५॥✎ 1570

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1570 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: प्रसन्‍नता-पूर्वक → प्रसन्‍नतापूर्वक

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