श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.32

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

एवं दीनवचः प्रोच्य वक्तारं चाथ पूजयेत्।

सम्भूष्य वस्त्रभूषाभिः पूजान्ते तं च संस्तवेत्॥ ३२

evaṃ dīnavacaḥ procya vaktāraṃ cātha pūjayet|

sambhūṣya vastrabhūṣābhiḥ pūjānte taṃ ca saṃstavet|| 32

अर्थ

इस प्रकार दीन वचन कहकर फिर वक्ताका पूजन करे। उसे सुन्दर वस्त्राभूषणोंसे विभूषित करे और फिर पूजाके पश्चात् उसकी इस प्रकार स्तुति करे—॥ ३२॥✎ 1570

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1570 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: प्रसन्‍नता-पूर्वक → प्रसन्‍नतापूर्वक

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