॥ श्रीहरिः ॥
ततस्तु श्रीफलं धृत्वा नमस्कारं समाचरेत्।
स्तुतिः प्रसन्नचित्तेन कर्तव्या केवलं तदा॥ २९
tatastu śrīphalaṃ dhṛtvā namaskāraṃ samācaret|
stutiḥ prasannacittena kartavyā kevalaṃ tadā|| 29
अर्थ
फिर पुस्तकके आगे नारियल रखकर नमस्कार करे और प्रसन्नचित्तसे इस प्रकार स्तुति करे—॥ २९॥
ततस्तु श्रीफलं धृत्वा नमस्कारं समाचरेत्।
स्तुतिः प्रसन्नचित्तेन कर्तव्या केवलं तदा॥ २९
फिर पुस्तकके आगे नारियल रखकर नमस्कार करे और प्रसन्नचित्तसे इस प्रकार स्तुति करे—॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 73) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/29/