श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.29

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

ततस्तु श्रीफलं धृत्वा नमस्कारं समाचरेत्।

स्तुतिः प्रसन्‍नचित्तेन कर्तव्या केवलं तदा॥ २९

tatastu śrīphalaṃ dhṛtvā namaskāraṃ samācaret|

stutiḥ prasannacittena kartavyā kevalaṃ tadā|| 29

अर्थ

फिर पुस्तकके आगे नारियल रखकर नमस्कार करे और प्रसन्‍नचित्तसे इस प्रकार स्तुति करे—॥ २९॥

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