श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.2

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

दैवज्ञं तु समाहूय मुहूर्तं पृच्छ्य यत्नतः।

विवाहे यादृशं वित्तं तादृशं परिकल्पयेत्॥ २

daivajñaṃ tu samāhūya muhūrtaṃ pṛcchya yatnataḥ|

vivāhe yādṛśaṃ vittaṃ tādṛśaṃ parikalpayet|| 2

अर्थ

पहले तो यत्नपूर्वक ज्योतिषीको बुलाकर मुहूर्त पूछना चाहिये तथा विवाहके लिये जिस प्रकार धनका प्रबन्ध किया जाता है उस प्रकार ही धनकी व्यवस्था इसके लिये करनी चाहिये॥ २॥

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