श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.86

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

यत्र सूर्यस्य सोमस्य सिद्धानां न गतिः कदा।

तं लोकं हि गतास्ते तु श्रीमद्भागवतश्रवात्॥ ८६

yatra sūryasya somasya siddhānāṃ na gatiḥ kadā|

taṃ lokaṃ hi gatāste tu śrīmadbhāgavataśravāt|| 86

अर्थ

जिस लोकमें सूर्य, चन्द्रमा और सिद्धोंकी भी कभी गति नहीं हो सकती, उसमें वे श्रीमद्भागवत श्रवण करनेसे चले गये॥ ८६॥

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