॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.5.76
एवमादि कृतं चेत्स्यात्तदा वै श्रवणे फलम्।
पुनः श्रवान्ते सर्वेषां वैकुण्ठे वसतिर्ध्रुवम्॥ ७६
evamādi kṛtaṃ cetsyāttadā vai śravaṇe phalam|
punaḥ śravānte sarveṣāṃ vaikuṇṭhe vasatirdhruvam|| 76
अर्थ
गुरुवचनोंमें विश्वास, दीनताका भाव, मनके दोषोंपर विजय और कथामें चित्तकी एकाग्रता इत्यादि नियमोंका यदि पालन किया जाय तो श्रवणका यथार्थ फल मिलता है। यदि ये श्रोता फिरसे श्रीमद्भागवतकी कथा सुनें तो निश्चय ही सबको वैकुण्ठकी प्राप्ति होगी॥ ७५-७६॥