श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.74

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

अवैष्णवो हतो देशो हतं श्राद्धमपात्रकम्।

हतमश्रोत्रिये दानमनाचारं हतं कुलम्॥ ७४

avaiṣṇavo hato deśo hataṃ śrāddhamapātrakam|

hatamaśrotriye dānamanācāraṃ hataṃ kulam|| 74

अर्थ

वैष्णवहीन देश, अपात्रको कराया हुआ श्राद्धका भोजन, अश्रोत्रियको दिया हुआ दान एवं आचारहीन कुल—इन सबका नाश हो जाता है॥ ७४॥

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