श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.7

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

बहुवित्तचयं दृष्ट्वा रात्रौ नार्यो व्यचारयन्।

चौर्यं करोत्यसौ नित्यमतो राजा ग्रहीष्यति॥ ७

bahuvittacayaṃ dṛṣṭvā rātrau nāryo vyacārayan|

cauryaṃ karotyasau nityamato rājā grahīṣyati|| 7

अर्थ

चोरीका बहुत माल देखकर रात्रिके समय स्त्रियोंने विचार किया कि ‘यह नित्य ही चोरी करता है, इसलिये इसे किसी दिन अवश्य राजा पकड़ लेगा॥ ७॥

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