श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.64

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

जडस्य शुष्कवंशस्य यत्र ग्रन्थिविभेदनम्।

चित्रं किमु तदा चित्तग्रन्थिभेदः कथाश्रवात्॥ ६४

jaḍasya śuṣkavaṃśasya yatra granthivibhedanam|

citraṃ kimu tadā cittagranthibhedaḥ kathāśravāt|| 64

अर्थ

भला, जिसके प्रभावसे जड़ और सूखे हुए बाँसकी गाँठें फट सकती हैं, उस भागवतकथाका श्रवण करनेसे चित्तकी गाँठोंका खुल जाना कौन बड़ी बात है॥ ६४॥✎ 17

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #17 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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