श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.58

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

अस्थिस्तम्भं स्नायुबद्धं मांसशोणितलेपितम्।

चर्मावनद्धं दुर्गन्धं पात्रं मूत्रपुरीषयोः॥ ५८

asthistambhaṃ snāyubaddhaṃ māṃsaśoṇitalepitam|

carmāvanaddhaṃ durgandhaṃ pātraṃ mūtrapurīṣayoḥ|| 58

अर्थ

अस्थियाँ ही इस शरीरके आधारस्तम्भ हैं, नस-नाडीरूप रस्सियोंसे यह बँधा हुआ है, ऊपरसे इसपर मांस और रक्त थोपकर इसे चर्मसे मँढ़ दिया गया है। इसके प्रत्येक अंगमें दुर्गन्ध आती है; क्योंकि है तो यह मल-मूत्रका भाण्ड ही॥ ५८॥

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