श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.28

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

कर्मणो नास्ति संख्या मे महाज्ञाने विवर्तिनः।

लोकानां हिंसकः सोऽहं स्त्रीभिर्दुःखेन मारितः॥ २८

karmaṇo nāsti saṃkhyā me mahājñāne vivartinaḥ|

lokānāṃ hiṃsakaḥ so'haṃ strībhirduḥkhena māritaḥ|| 28

अर्थ

मेरे कुकर्मोंकी गिनती नहीं की जा सकती। मैं तो महान् अज्ञानमें चक्कर काट रहा था। इसीसे मैंने लोगोंकी बड़ी हिंसा की। अन्तमें कुलटा स्त्रियोंने मुझे तड़पा-तड़पाकर मार डाला॥ २८॥

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