श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.24

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

गोकर्ण उवाच

कस्त्वमुग्रतरो रात्रौ कुतो यातो दशामिमाम्।

किं वा प्रेतः पिशाचो वा राक्षसोऽसीति शंस नः॥ २४

kastvamugrataro rātrau kuto yāto daśāmimām|

kiṃ vā pretaḥ piśāco vā rākṣaso'sīti śaṃsa naḥ|| 24

अर्थ

गोकर्णने कहा—तू कौन है? रात्रिके समय ऐसे भयानक रूप क्यों दिखा रहा है? तेरी यह दशा कैसे हुई? हमें बता तो सही—तू प्रेत है, पिशाच है अथवा कोई राक्षस है?॥ २४॥

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