श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.14

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

स्त्रीणां नैव तु विश्वासं दुष्टानां कारयेद्बुधः।

विश्वासे यः स्थितो मूढः स दुःखैः परिभूयते॥ १४

strīṇāṃ naiva tu viśvāsaṃ duṣṭānāṃ kārayedbudhaḥ|

viśvāse yaḥ sthito mūḍhaḥ sa duḥkhaiḥ paribhūyate|| 14

अर्थ

बुद्धिमान् पुरुषको दुष्टा स्त्रियोंका कभी विश्वास न करना चाहिये। जो मूर्ख इनका विश्वास करता है, उसे दुःखी होना पड़ता है॥ १४॥

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