श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.69

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

हिंसकः शस्त्रधारी च दीनान्धानां प्रपीडकः।

चाण्डालाभिरतो नित्यं पाशहस्तः श्‍वसंगतः॥ ६९

hiṃsakaḥ śastradhārī ca dīnāndhānāṃ prapīḍakaḥ|

cāṇḍālābhirato nityaṃ pāśahastaḥ śvasaṃgataḥ|| 69

अर्थ

हिंसाका उसे व्यसन-सा हो गया था। हर समय वह अस्त्र-शस्त्र धारण किये रहता और बेचारे अंधे और दीन-दुःखियोंको व्यर्थ तंग करता। चाण्डालोंसे उसका विशेष प्रेम था; बस, हाथमें फंदा लिये कुत्तोंकी टोलीके साथ शिकारकी टोहमें घूमता रहता॥ ६९॥

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