॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.4.42
सत्यं शौचं दया दानमेकभक्तं तु भोजनम्।
वर्षावधि स्त्रिया कार्यं तेन पुत्रोऽतिनिर्मलः॥ ४२
satyaṃ śaucaṃ dayā dānamekabhaktaṃ tu bhojanam|
varṣāvadhi striyā kāryaṃ tena putro'tinirmalaḥ|| 42
अर्थ
तुम्हारी स्त्रीको एक सालतक सत्य, शौच, दया, दान और एक समय एक ही अन्न खानेका नियम रखना चाहिये। यदि वह ऐसा करेगी तो बालक बहुत शुद्ध स्वभाववाला होगा’॥ ४२॥