no cettyajāmyahaṃ prāṇāṃstvadagre śokamūrcchitaḥ|| 37
अर्थ
ब्राह्मणने कहा—महात्माजी! विवेकसे मेरा क्या होगा। मुझे तो बलपूर्वक पुत्र दीजिये; नहीं तो मैं आपके सामने ही शोकमूर्च्छित होकर अपने प्राण त्यागता हूँ ॥ ३७॥
विवेकेन भवेत्किं मे पुत्रं देहि बलादपि।
नो चेत्त्यजाम्यहं प्राणांस्त्वदग्रे शोकमूर्च्छितः॥ ३७
ब्राह्मणने कहा—महात्माजी! विवेकसे मेरा क्या होगा। मुझे तो बलपूर्वक पुत्र दीजिये; नहीं तो मैं आपके सामने ही शोकमूर्च्छित होकर अपने प्राण त्यागता हूँ ॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 57) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/37/