इत्युक्त्वा स रुरोदोच्चैस्तत्पार्श्वं दुःखपीडितः।
तदा तस्य यतेश्चित्ते करुणाभूद्गरीयसी॥ ३२
ityuktvā sa rurodoccaistatpārśvaṃ duḥkhapīḍitaḥ|
tadā tasya yateścitte karuṇābhūdgarīyasī|| 32
अर्थ
यों कहकर वह ब्राह्मण दुःखसे व्याकुल हो उन संन्यासी महात्माके पास फूट-फूटकर रोने लगा। तब उन यतिवरके हृदयमें बड़ी करुणा उत्पन्न हुई॥ ३२॥
इत्युक्त्वा स रुरोदोच्चैस्तत्पार्श्वं दुःखपीडितः।
तदा तस्य यतेश्चित्ते करुणाभूद्गरीयसी॥ ३२
यों कहकर वह ब्राह्मण दुःखसे व्याकुल हो उन संन्यासी महात्माके पास फूट-फूटकर रोने लगा। तब उन यतिवरके हृदयमें बड़ी करुणा उत्पन्न हुई॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 57) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/32/