॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.4.21
पश्चाद्धर्माः समारब्धास्ताभ्यां संतानहेतवे।
गोभूहिरण्यवासांसि दीनेभ्यो यच्छतः सदा॥ २१
paścāddharmāḥ samārabdhāstābhyāṃ saṃtānahetave|
gobhūhiraṇyavāsāṃsi dīnebhyo yacchataḥ sadā|| 21
अर्थ
जब अवस्था बहुत ढल गयी, तब उन्होंने सन्तानके लिये तरह-तरहके पुण्यकर्म आरम्भ किये और वे दीन-दुःखियोंको गौ, पृथ्वी, सुवर्ण और वस्त्रादि दान करने लगे॥ २१॥