उसे लोगोंकी बात करनेमें सुख मिलता था। स्वभाव था क्रूर। प्रायः कुछ-न-कुछ बकवाद करती रहती थी। गृहकार्यमें निपुण थी, कृपण थी और थी झगड़ालू भी॥ १९॥
लोकवार्तारता क्रूरा प्रायशो बहुजल्पिका।
शूरा च गृहकृत्येषु कृपणा कलहप्रिया॥ १९
उसे लोगोंकी बात करनेमें सुख मिलता था। स्वभाव था क्रूर। प्रायः कुछ-न-कुछ बकवाद करती रहती थी। गृहकार्यमें निपुण थी, कृपण थी और थी झगड़ालू भी॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 55) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/19/