उस नगरमें समस्त वेदोंका विशेषज्ञ और श्रौत-स्मार्त कर्मोंमें निपुण एक आत्मदेव नामक ब्राह्मण रहता था, वह साक्षात् दूसरे सूर्यके समान तेजस्वी था॥ १७॥
आत्मदेवः पुरे तस्मिन् सर्ववेदविशारदः।
श्रौतस्मार्तेषु निष्णातो द्वितीय इव भास्करः॥ १७
उस नगरमें समस्त वेदोंका विशेषज्ञ और श्रौत-स्मार्त कर्मोंमें निपुण एक आत्मदेव नामक ब्राह्मण रहता था, वह साक्षात् दूसरे सूर्यके समान तेजस्वी था॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 55) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/17/