क्योंकि जहाँ भी श्रीमद्भागवतकी कथा होती है वहाँ ये भक्ति आदि अपने-आप पहुँच जाते हैं। वहाँ कानोंमें कथाके शब्द पड़नेसे ये तीनों तरुण हो जायँगे॥ ९॥
यत्र भागवती वार्ता तत्र भक्त्यादिकं व्रजेत्।
कथाशब्दं समाकर्ण्य तत्त्रिकं तरुणायते॥ ९
क्योंकि जहाँ भी श्रीमद्भागवतकी कथा होती है वहाँ ये भक्ति आदि अपने-आप पहुँच जाते हैं। वहाँ कानोंमें कथाके शब्द पड़नेसे ये तीनों तरुण हो जायँगे॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 48) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/9/